Second Hand Car Buying Rules: अभी के समय में कार होना हर किसी की जरूरत बन चुकी है। नौकरी से लेकर परिवार और रोजमर्रा की जिम्मेदारियां की वजह से बीना गाड़ी के काम चलना बहुत ही ज्यादा मुश्किल हो जाता है। लेकिन आप बढ़ती हुई कीमतों की वजह से हर कोई नई गाड़ी नहीं खरीद पाता है और इसी के चलते बहुत सारे लोग तो सेकंड हैंड कार खरीदने का ऑप्शन का चुनाव करते हैं। लेकिन यहीं पर वह बहुत बड़ी गलती कर बैठते हैं।
अगर आपने भी पुरानी कार खरीद ली है और उसके दस्तावेज अपने नाम पर ट्रांसफर नहीं करवाए हैं तो आपको सावधान हो जाना चाहिए। उत्तर प्रदेश के नोएडा में सेकंड हैंड कार को लेकर सख्त नियम लागू कर दिए गए हैं। अगर ओनरशिप अपडेट नहीं होती है तो आपकी गाड़ी को जब्त किया जा सकता है।
पुलिस ने सड़कों पर औचक निरीक्षण अभियान चलाने का भी फैसला कर लिया है। इस अभियान के जरिए ऐसी सभी पुरानी गाड़ियों की जांच की जाएगी जिनके दस्तावेज अधूरे हैं या फिर मालिकाना हक अपडेट नहीं हुआ है। पुलिस साफ तौर पर रहती है कि नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही होगी।
दरअसल पुरानी गाड़ियां कई बार हाथ बदलती है, लेकिन आरटीओ रिकॉर्ड अपडेट नहीं होता है। खास कर तब जब डील दो प्राइवेट लोगों जैसे दोस्तों या फिर रिश्तेदारों के बीच में की जाती है। गाड़ी के कागजात पुराने मालिक के नाम पर ही चलते रहते हैं। लेकिन गाड़ी कोई और चल रहा होता है। इसीलिए यह सब चीजें पुलिस के लिए सर दर्द बनकर रह जाती हैं।
गलत या फिर पुराने एड्रेस के कारण असली मालिक तक पहुंचना भी काफी मुश्किल हो जाता है। काफी सारे लोग तो घर बदल देते हैं लेकिन आरटीओ में अपना एड्रेस अपडेट नहीं करवाते हैं। इसीलिए अगर गाड़ी किसी अपराध में इस्तेमाल हो जाती है तो जांच और ज्यादा मुश्किल हो जाती है। इसीलिए बहुत ज्यादा सख़्ती कर दी गई है।
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अभी के वक्त में गौतम बुद्ध नगर जिले के तीनों जोन में पुलिस रेंडम चेकिंग में लगी हुई है। जिन भी गाड़ियों के डॉक्यूमेंट पूरे नहीं होंगे उनको मौके पर ही जब्त कर लिया जाएगा। पुलिस और प्रशासन कहता है कि कई सारे आपराधिक मामलों में पुरानी, बिना ट्रांसफर की हुई गाड़ियां सामने आई है। इस पर लगाम लगाना बहुत ही ज्यादा जरूरी हो गया।
दरअसल सेकंड हैंड गाड़ी मालिकों को परिवहन विभाग की वेबसाइट पर जाकर फॉर्म भरना पड़ता है। इसमें एड्रेस से लेकर चेसिस नंबर, मॉडल नंबर और बाकी की जानकारी देना जरूरी हो जाता है। द रजिस्ट्रेशन फीस का भुगतान और वेरिफिकेशन पूरा हो जाने के बाद में गाड़ी कानूनी तौर पर आपका नाम पर मानी जाती है।