PM Vikasit Bharat Rojgar Yojana: देश के वर्कफोर्स को मजबूत करने और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मोदी सरकार ने एक बेहद महत्वाकांक्षी कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस कल्याणकारी योजना की रूपरेखा तैयार करते हुए इसे 1 अगस्त 2025 से लागू किया था, जो कि 31 जुलाई 2027 तक प्रभावी रूप से संचालित की जाएगी।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य कॉर्पोरेट और औद्योगिक क्षेत्रों में नए रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना और युवाओं को वित्तीय रूप से साक्षर बनाना है। आइए इस विस्तृत और संपूर्ण रिपोर्ट में समझते हैं कि इस योजना का लाभ उठाने के लिए क्या शर्तें तय की गई हैं और आपके इन-हैंड वेतन पर इसका क्या असर पड़ेगा।
क्या है प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना

केंद्र सरकार ने देश में बढ़ती बेरोजगारी पर लगाम लगाने और युवाओं को औपचारिक नौकरियों की तरफ आकर्षित करने के लिए इस विशेष सब्सिडी स्कीम का ताना-बाना बुना है। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद इस योजना को धरातल पर उतारा गया है।
इस योजना के तहत सरकार उन युवाओं को आर्थिक संबल दे रही है जो अपने करियर की शुरुआत कर रहे हैं। दो साल की अवधि के लिए तैयार की गई इस योजना से देश के लाखों उन छात्र-छात्राओं को सीधा संबल मिलेगा जो अपनी पढ़ाई पूरी करके विभिन्न कंपनियों, फैक्ट्रियों या स्टार्टअप्स में अपनी पहली नौकरी जॉइन कर रहे हैं।
सरकार को उम्मीद है कि इस वित्तीय प्रोत्साहन से युवाओं की शुरुआती जरूरतें पूरी होंगी और वे बिना किसी आर्थिक तनाव के अपने करियर पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।
किसे मिलेगा इस योजना का सीधा लाभ
सबसे पहली और अनिवार्य शर्त यह है कि आवेदक ने अपने जीवन में पहली बार किसी संगठित क्षेत्र (Formal Sector) में नौकरी की शुरुआत की हो। इसका प्रमाण यह होगा कि उसका यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) और ईपीएफओ (EPFO) पंजीकरण एकदम नया होना चाहिए।
इसके अलावा, जिन कर्मचारियों का मासिक वेतन ₹1 लाख या उससे अधिक है, वे इस योजना के दायरे से बाहर रहेंगे। यह योजना विशुद्ध रूप से मध्यम और निम्न आय वर्ग के उन युवाओं के लिए है जो जमीनी स्तर पर मेहनत करके कॉर्पोरेट जगत में कदम रख रहे हैं।
दो किस्तों में जारी होगा पैसा
सरकार इस योजना के तहत मिलने वाली ₹15,000 की राशि को एकमुश्त देने के बजाय दो अलग-अलग चरणों में जारी करेगी। नौकरी के पहले 6 महीने सफलतापूर्वक पूरे होने पर कर्मचारी को ₹7,500 की पहली किस्त दी जाएगी।
हालांकि, इस पैसे को हासिल करने के लिए कर्मचारी को सरकार द्वारा संचालित एक मुफ्त वित्तीय साक्षरता कोर्स (Financial Literacy Course) पूरा करना होगा, ताकि युवा अपने पैसों का सही प्रबंधन करना सीख सकें। यह राशि सीधे उनके लिंक्ड बैंक खाते में भेजी जाएगी।
इसके बाद, जब कर्मचारी अपनी नौकरी के लगातार 12 महीने यानी एक साल पूरा कर लेगा, तब उसे ₹7,500 की दूसरी किस्त जारी की जाएगी। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह दूसरी किस्त सीधे हाथ में या चालू खाते में नहीं आएगी; बल्कि सरकार इसे एक सुरक्षित बचत योजना (Savings Scheme) में जमा करेगी, जिसका भुगतान कर्मचारी को बाद में ब्याज सहित किया जाएगा।

कितना मिलेगा इन-हैंड वेतन
योजना का लाभ लेने वाले नए कर्मचारियों के लिए यह समझना बेहद जरूरी है कि नौकरी जॉइन करते समय जो ग्रॉस सैलरी तय होती है, वह पूरी की पूरी हाथ में नहीं मिलती है। ईपीएफओ के नियमों के मुताबिक, वेतन में से भविष्य निधि (PF) की कटौती की जाती है।
यदि किसी नए युवा की मासिक ग्रॉस सैलरी ₹15,000 तय की गई है, तो उसका मूल वेतन (Basic Salary) और महंगाई भत्ता (DA) आमतौर पर ₹9,000 से ₹10,500 के बीच निर्धारित होता है। नियमानुसार, इस मूल वेतन पर 12% की दर से पीएफ काटा जाता है।
इस अनिवार्य कटौती के बाद, कर्मचारी को हर महीने मिलने वाला इन-हैंड वेतन (Take-Home Salary) लगभग ₹13,500 से ₹13,900 के बीच प्राप्त होगा। हालांकि, यह कटी हुई राशि उनके पीएफ खाते में पूरी तरह सुरक्षित रहेगी, जो उनके भविष्य के लिए एक बेहतरीन फंड का काम करेगी।