⚡ AMP FAST
GOOGLE AMP STORY

क्या है फिशिंग क्राइम? CBI ने पूरे मामले की खोली पोल

By Kanchan • December 25, 2025 ✔ E-E-A-T Verified

Phishing Crime: अभी के वक्त में साइबर अपराध तेजी से काफी ज्यादा बढ़ते जा रहे हैं और आम लोग कई बार इसके शिकार हो जाते हैं। लेकिन हाल ही में सीबीआई ने एक ऐसे ही बड़े फिशिंग क्राइम नेटवर्क का भंडाफोड़ कर दिया है। जो कि साइबर अपराधियों को फिशिंग मेसेज सर्विस मुहैया करवाते थे। जिसके जरिए फर्जी लोन से लेकर निवेश और फायदे का लालच देकर लोगों से ठगी हो रही थी।

जांच एजेंसी ने इस मामले में तीन ऑपरेटिव को गिरफ्तार कर लिया। दिल्ली से लेकर नोएडा और चंडीगढ़ में हुई छापेमारी के वक्त एक एक्टिव सिस्टम भी सामने आया। जिसमें बड़े पैमाने पर फिशिंग मैसेज भेजे जा रहे थे। यहां पर भारी नगदी से लेकर क्रिप्टो करेंसी और कई तरीके के डिजिटल सबूत भी मिले। इस कार्यवाही के बाद में फिशिंग क्राइम को लेकर लोगों के मन में कई सारे सवाल आ रहे हैं। लोग जानना चाहते हैं कि आखिरकार यह फिशिंग क्रीम क्या होता है तो आज हम आपको यही बताएंगे।

क्या है फिशिंग क्राइम?

फिशिंग क्राइम साइबर धोखाधड़ी का एक ऐसा तरीका होता है जिसके अंदर अपराधी खुद को बैंक, कंपनी या फिर सरकारी एजेंसी बात कर लोगों को मैसेज करता है या फिर ईमेल भेजता है। इनसे फर्जी लोन, इनाम, निवेश या फिर अकाउंट अपडेट का भी झांसा दिया जाता है। जैसे कोई भी व्यक्ति दिए गए लिंक पर अगर क्लिक कर देता है या फिर अपनी पर्सनल डिटेल को शेयर कर देता है तो अपराधी उसका डाटा चुरा लेता है।

बाद में बैंक अकाउंट खाली करने से लेकर फर्जी लोन लेना या फिर डिजिटल फ्रॉड करना बहुत ही ज्यादा आसान हो जाता है। सीबीआई की जांच में यह सामने आ चुका है कि इस नेटवर्क द्वारा हजारों सिम कार्ड भी इस्तेमाल किया जा चुके थे। जिससे कि एक साथ बड़ी संख्या में लोगों के साथ फर्जी मैसेज पहुंचा जा रहे। यह पूरा सिस्टम तकनीक के सहारे कंट्रोल किया जा रहा था और इससे अपराधी की पहचान हमेशा छुपी रही।

Read More: 8 साल पुरानी Maruti alto k10 1.50 लाख में खरीदें, जानें फीचर्स

सीबीआई जांच में क्या मिला?

सीबीआई ने शुरुआती जांच में तो तकरीबन 21000 ऐसे सिम कार्ड की पहचान कर ली जो नियमों का उल्लंघन करके धोखाधड़ी से लिए गए थे। जांच में पता चला कि कुछ टेलीकॉम कंपनियों के चैनल पार्टनर और उनके कर्मचारियों ने अवैध तरीके से सिम कार्ड की व्यवस्था कर दी थी। में सिम कार्ड को एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए कंट्रोल किया जा रहा था और बड़े पैमाने पर फिशिंग मैसेज भी भेजे जा रहे थे।

सीबीआई की माने तो निजी फॉर्म भगवान महावीर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड इस पूरे सिस्टम को चल रही थी। इसी प्लेटफार्म के जरिए साइबर अपराधी पूरे देश में लोगों को फर्जी मैसेज भेज कर उनके साथ में ठगी कर रहे थे। इससे पता चलता है कि फिशिंग क्राइम अब संगठित नेटवर्क के तौर पर काम कर रहे हैं। जिससे सतर्क रहना पहले से और भी ज्यादा जरूरी हो चुका है।