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जम्मू क्षेत्र में खतरनाक संकेत दे रही है सैनिकों की शहादत में वृद्धि

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सुभाष राज, स्वतंत्र पत्रकार, 28 जनवरी 2025: जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तानी छद्म युद्ध के हथियार यानि आतंकवादियों ने अपनी रणनीति बदलकर सेना के सामने नई चुनौतियां पेश की हैं. इससे सेना की आतंकरोधी कार्रवाईयों में बिखराव की आशंका है. आतंकवादियों की बदली रणनीति सेना की आक्रामक यूनिटों की कार्रवाई की क्षमता घटा रही है। दूसरे शब्दों में कहें तो सैन्य बलों को अब घाटी के अलावा जंगलों और दुर्गम पहाड़ों में भी आपरेशन करने पड़ रहे हैं। इन बदली परिस्थितियों के बावजूद सेना की रणनीति में कोई खास बदलाव नहीं दिख रहा है। जबकि अब समय आ गया है कि सैन्य और राजनीतिक स्तर पर नए दृष्टिकोण को अमलीजामा पहनाया जाए।

 

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लगभग 35 साल से आतंकवाद से त्रस्त जम्मू—कश्मीर में एक ओर आतंकवादी हिंसा अब तक के सबसे निचले स्तर पर दिख रही है। पर्यटन में तेजी आई है, और बुनियादी ढांचे के विकास में भी प्रगति देखने को मिल रही है। स्थानीय लोग केंद्र सरकार के साथ तालमेल बनाए हुए हैं। लेकिन जम्मू क्षेत्र में 15,000 अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती ये बता रही है कि कुछ गड़बड़ है। इस क्षेत्र में अचानक आतंकी हमलों में नया ट्रेंड और उनके भीषण परिणामों की वजह से जम्मू क्षेत्र में मुठभेड़ों में 1:1 के अनुपात में सैनिकों का हताहत होना चिंता का विषय है।

इन हालात का विश्लेषण बताता है कि पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में छद्म युद्ध को जारी रखे हुए है। सक्रिय आतंकवादियों में से 80% और मारे गए आतंकवादियों में से 60% का पाकिस्तानी मूल का होना यह दर्शाता है कि पाकिस्तान अब आतंकवादियों की कम संख्या के बावजूद हिंसा भड़काने की कोशिश में जुटा हुआ है।

शायद यही कारण है कि आतंकवादी अब सेना से सीधे टकराव से बचते हैं और जंगल व पहाड़ी क्षेत्रों में अड्डे बनाकर घात लगाकर हमले करते हैं। वे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से दूर रहते हैं, जहां सेना की भारी तैनाती है। वे झूठी खबरें फैलाकर सुरक्षा बलों को जंगली इलाकों में खींचते हैं और वहां हमला करते हैं। कभी-कभी नागरिकों और पुलिस को निशाना बनाकर अपनी मौजूदगी जताते हैं।

वैसे तो यह बदलाव आतंकवादियों की कमजोरी का संकेत है, लेकिन यह भारतीय सेना के लिए नई चुनौतियां भी दरपेश कर रहा है। वर्तमान में सेना का आतंकवाद-रोधी ग्रिड मुख्य रूप से विकसित क्षेत्रों पर केंद्रित है, जहां राष्ट्रीय राइफल्स की बटालियनें तैनात हैं। लेकिन जंगली और पहाड़ी क्षेत्रों में गश्त और ऑपरेशन सीमित हैं। आतंकवादी इसका फायदा उठाकर इन क्षेत्रों में स्वतंत्र रूप से सक्रिय रहते हैं, जिससे सुरक्षा बलों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।

यद्यपि पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति बदहाल है। बलूचिस्तान में विद्रोह, खैबर पख्तूनख्वा में तहरीक-ए-तालिबान की गतिविधियां और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे की बढ़ती असुरक्षा उसकी क्षमता को कमजोर कर रही है। बावजूद इसके वह जम्मू-कश्मीर में छद्म युद्ध को 100-150 आतंकवादियों के जरिए जीवित रखने की कोशिश कर रहा है। सैन्य अधिकारियों के खुफिया अनुमानों के मुताबिक क्षेत्र में कुल 119 आतंकवादी सक्रिय हैं, जिनमें से 79 पीर पंजाल पहाड़ियों के उत्तर में और 40 दक्षिण में हैं। इनमें से अधिकांश पाकिस्तानी हैं। इनकी संख्या बनाए रखने के लिए हर साल कम से कम 100 आतंकवादियों की घुसपैठ और हथियारों की आपूर्ति जरूरी है।

भारतीय सेना की वर्तमान रणनीति ‘संघर्ष प्रबंधन’ पर केंद्रित है, जो आतंकवादी घुसपैठ और तस्करी को नियंत्रित करने पर जोर देती है। लेकिन इसे पूरी तरह खत्म करने के लिए अतिरिक्त संसाधनों और नई रणनीति की आवश्यकता है। आतंकवाद अब मुख्य रूप से पाकिस्तानी घुसपैठियों पर निर्भर है, क्योंकि स्थानीय भर्ती सीमित हो गई है। इसे रोकने के लिए घुसपैठ-रोधी ग्रिड को मजबूत करने के साथ ही ग्रिड को कम से कम 60 अतिरिक्त कंपनियां उपलब्ध कराई जाएं। इसके अलावा ड्रोन, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस सिस्टम का उपयोग भी बढ़ाना होगा।

आतंकवाद-रोधी ग्रिड का पुनर्गठन करके राष्ट्रीय राइफल्स की 62 बटालियनों में से आधी को जंगली और पहाड़ी क्षेत्रों में तैनात करना होगा। जंगली और पहाड़ी क्षेत्रों को आतंकवादियों से मुक्त करने के लिए पैरा कमांडो और अन्य स्पेशल फोर्स की अतिरिक्त बटालियनें तैनात की जाएं क्योंकि ये घात और कोवर्ट ऑपरेशन में माहिर होती हैं। मौजूदा संसाधनों के बेहतर उपयोग और पुनर्तैनाती की जाना भी आवश्यक है।

सैन्य रणनीति के साथ-साथ राजनीतिक कदम भी जरूरी हैं। जम्मू-कश्मीर ने अनुच्छेद 370 की समाप्ति को स्वीकार कर लिया है। लेकिन केन्द्र सरकार जल्द से जल्द इसका पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करके विकास-केंद्रित आर्थिक पैकेज देकर जनता का विश्वास जीत सकती है। इससे सेना को आतंकवादियों को खदेड़ने का नैतिक और सामाजिक आधार मिलेगा और सरकार को भी इस अशांत राज्य में शांति स्थापित करने का स्वर्णिम मौका भी मिलेगा।

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