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सिर्फ रजिस्ट्री से प्रॉपर्टी पर नहीं होता मालिकाना हक, जानें ज़रूरी दस्तावेज

By Kanchan • December 30, 2025 ✔ E-E-A-T Verified

Property Registration Rules: अगर आप कोई भी मकान, फ्लैट या फिर कोई प्रॉपर्टी खरीदने जा रहे हैं तो आपको एक बात का ध्यान ज्यादा रखना है कि सिर्फ प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री करवाने से आपका उस प्रॉपर्टी पर मलिक आना हक साबित नहीं हो जाता है। साल 2025 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने यह साफ कर दिया था कि सिर्फ स्मारक की रजिस्ट्री से आप उसका मालिक आना हक प्राप्त नहीं कर सकते हैं।

प्रॉपर्टी के ऊपर मलिक आना हक जताने के लिए रजिस्ट्री के अलावा म्यूटेशन यानी कि बकाया खारिज भी बहुत ज्यादा जरूरी होता है। ऐसा इसीलिए क्योंकि म्यूटेशन होने के बाद में राजस्व विभाग में संपत्ति वाले व्यक्ति का नाम उस संपत्ति के मालिक के साथ में आधिकारिक तौर पर जोड़ दिया जाता है। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट द्वारा महनूर फातिमा इमरान बनाम स्टेट ऑफ़ तेलंगाना कैसे की सुनवाई के दौरान दिया गया।

क्या था सुप्रीम कोर्ट का फैसला?

अगर किसी भी व्यक्ति ने सिर्फ प्रॉपर्टी के रजिस्ट्री करवा कर खरीद ली है जिसमें मकान, फ्लैट या फिर कोई भी अन्य स्थान शामिल होता है। तो वह व्यक्तिगत तौर पर प्राप्त संपत्ति पर मालिकाना हक साबित नहीं कर सकते हैं। ऐसा इसीलिए क्योंकि किसी भी संपत्ति की खरीद को विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज करवाना पड़ता है। इसीलिए मालिकाना हक जाहिर करने के लिए रजिस्ट्री के अलावा कई सारे जरूरी तत्वों की भी जरूरत पड़ती है। कॉलेज डीड से लेकर मदर डीड, और म्यूटेशन दस्तावेज भी होते हैं।

कौन से दस्तावेज है जरूरी?

किसी भी प्रॉपर्टी पर अपना मलिक आना हक जताने के लिए सिर्फ रजिस्ट्री लाइसेंस ही जरूरी नहीं होता है। इनमें से सबसे ज्यादा जरूरी मदर डीड होता है। जिसके जरिए पता चलता है कि जो भी व्यक्ति प्रतिष्ठित व्यक्ति है उसके पास में वह संपत्ति कहां से है और इससे पहले उस संपत्ति पर पत्रक नाम दिया गया था। इसका मतलब है कि दस्तावेज से पूरी प्रॉपर्टी का इतिहास सामने आ जाता है।

मदर डीड के अलावा एक और जरूरी दस्तावेज होता है एंकेम्ब्रेंस प्लॉट। जिसकी मदद से जांच में यह पता चल जाता है कि जिस भी प्रॉपर्टी को वह हासिल कर रही है उस पर पहले से कोई लोन तो नहीं है या फिर वह किसी भी तरीके के कानूनी पहचान में फंसी तो नहीं है।

इसके बाद में सबसे ज्यादा जरूरी होता है म्यूटेशन यानी कि भुगतान खारिज। इस पूरे प्रक्रिया के जरिए रजिस्ट्री के बाद में सिक्के का नाम सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज कर दिया जाता है। अगर यह दस्तावेज नहीं होते हैं तो सरकारी अखबार में पुराने मालिक का नाम दर्ज किया जाता है और बाद में आपका नाम मलिक के तौर पर दर्ज नहीं कर सकते।

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आपको इस बात का भी ध्यान रखना होगा की प्रॉपर्टी के पुराने मालिक ने सभी टैक्स लागू कर दिए हैं या नहीं। जिसमें हाउस टैक्स सबसे ज्यादा जरूरी माना जाता है। अगर आप बिना पूरी जांच और पड़ताल के स्नातक पद के लिए आवेदन कर सकते हैं तो संपत्ति का दस्तावेजीकरण आपको भरना पड़ेगा।