NHAI New Toll Plaza Rules: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) का यह क्रांतिकारी कदम देश के करोड़ों वाहन चालकों को बार-बार टोल टैक्स देने के आर्थिक बोझ और टोल नाकों पर लगने वाले लंबे ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत दिलाएगा। सरकार ने इस सख्त नियम को जमीनी स्तर पर पारदर्शी तरीके से लागू करने के लिए एक हाई-लेवल टोल कमेटी का भी गठन किया है।
इस नए नियम से न सिर्फ आपकी यात्रा का खर्च कम होगा बल्कि सफर का समय भी बचेगा। आइए इस बेहद विस्तृत और संपूर्ण रिपोर्ट में समझते हैं कि सरकार की इस नई गाइडलाइन में शहरी क्षेत्रों के लिए क्या नियम हैं, पुराने टोल प्लाजा पर इसका क्या असर होगा और दिल्ली को लेकर क्या बड़ा प्लान तैयार किया गया है।
60 किलोमीटर का नया नियम

मंत्रालय द्वारा जारी की गई नई एसओपी (SOP) के अनुसार, अब देश में बनने वाले किसी भी नए नेशनल हाईवे या एक्सप्रेसवे पर दो टोल प्लाजा के बीच कम से कम 60 किलोमीटर की दूरी होना कानूनी रूप से अनिवार्य कर दिया गया है।
सरकार का स्पष्ट मानना है कि बहुत कम दूरी पर बार-बार आने वाले टोल नाके न केवल आम जनता की जेब पर डाका डालते हैं, बल्कि यात्रा के दौरान उनके मानसिक तनाव और असुविधा को भी बढ़ाते हैं।
इस नए नियम के लागू होने के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) भविष्य के सभी नए प्रोजेक्ट्स के ब्लूप्रिंट में इस दूरी का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करेगा।
हालांकि, कुछ बेहद जटिल या विशेष भौगोलिक परिस्थितियों में अगर 60 किलोमीटर के भीतर टोल प्लाजा बनाना अनिवार्य हो जाता है, तो निर्माण एजेंसी को इसके लिए सीधे हाई-लेवल कमेटी से विशेष लिखित अनुमति लेनी होगी। बिना इस उच्च स्तरीय मंजूरी के 60 किमी के दायरे में एक भी नया ईंट नहीं रखा जा सकेगा।
लोकल यात्रियों को मिलेगी टोल टैक्स से बड़ी राहत
शहर के भीतर या आस-पास के इलाकों में अप-डाउन करने वाले नौकरीपेशा और स्थानीय वाहन चालकों को राहत देने के लिए सरकार ने शहरी क्षेत्रों के पास टोल बनाने के नियमों को और अधिक कड़ा कर दिया है। नई एसओपी के मुताबिक, अब किसी भी म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (नगर निगम सीमा) या मुख्य शहरी रिहायशी इलाके के 10 किलोमीटर के दायरे के भीतर नया टोल प्लाजा बनाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।
अक्सर देखा जाता था कि शहरों के बिल्कुल मुहाने पर टोल प्लाजा होने के कारण स्थानीय निवासियों को भी महज कुछ किलोमीटर के सफर के लिए भारी-भरकम टैक्स चुकाना पड़ता था, जिससे स्थानीय स्तर पर काफी विरोध प्रदर्शन भी होते थे। सरकार के इस 10 किलोमीटर वाले नए सुरक्षा कवच के बाद शहरों के भीतर आने-जाने वाले दैनिक यात्रियों की जेब सुरक्षित रहेगी और उन्हें बेवजह टोल बूथों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
पुराने टोल नाकों की स्थिति
इस बड़े फैसले के बीच आपके मन में यह सवाल जरूर उठ रहा होगा कि वर्तमान में जो टोल प्लाजा बहुत पास-पास हैं, उनका क्या होगा? सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मौजूदा समय में पूरे देश में 130 से अधिक ऐसी लोकेशन हैं, जहां दो टोल प्लाजा के बीच की दूरी 60 किलोमीटर से काफी कम है।
सरकार ने साफ किया है कि यह नई एसओपी पुराने चालू टोल प्लाजा पर लागू नहीं होगी, बल्कि भविष्य में बनने वाले नए एक्सप्रेसवे और हाईवे प्रोजेक्ट्स के लिए ही मान्य होगी। इन सभी व्यवस्थाओं की कमान एनएचआई के कमर्शियल ऑपरेशंस मेंबर की अध्यक्षता वाली हाई-लेवल टोल कमेटी के हाथों में होगी जो अनावश्यक टोल वसूली पर पैनी नजर रखेगी।

बैरियर-फ्री तकनीक
देश की राजधानी दिल्ली में ट्रैफिक की रफ्तार को सुपरफास्ट बनाने के लिए एक और क्रांतिकारी तकनीक पर काम शुरू हो चुका है। म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफ दिल्ली (MCD) ने दिल्ली की सीमाओं पर स्थित सभी 156 टोल प्लाजा को पूरी तरह से बैरियर-फ्री (Barrier-Free) बनाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है।
इसके तहत दिल्ली के प्रवेश द्वारों पर ‘मल्टी-लेन फ्री फ्लो सिस्टम’ लगाया जा रहा है, जिससे गाड़ियों को टोल टैक्स कटवाने के लिए रुकना ही नहीं पड़ेगा और फास्टैग या आधुनिक कैमरों की मदद से गाड़ी के चलते रहने के दौरान ही टैक्स ऑटोमैटिक कट जाएगा।
इस आधुनिक अपग्रेडेशन से दिल्ली-एनसीआर के लाखों दैनिक यात्रियों को सुबह और शाम के पीक आवर्स में लगने वाले कड़े ट्रैफिक जाम से हमेशा के लिए आजादी मिल जाएगी।