8th Pay Commission Fitment Factor: केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए आने वाले दिनों में सैलरी में होने वाली बढ़ोतरी पूरी तरह से फिटमेंट फैक्टर के गणित पर निर्भर करती है। आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के तहत फिटमेंट फैक्टर जितना अधिक तय होगा, कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी और भत्तों में उतनी ही कड़क बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। हालांकि, वित्त मंत्रालय की तरफ से इस पर अंतिम मुहर लगना अभी बाकी है, लेकिन कर्मचारी यूनियनों ने इसे लेकर अपनी मांगें तेज कर दी हैं।
क्या होता है फिटमेंट फैक्टर
कैलकुलेशन के लिहाज से फिटमेंट फैक्टर एक तरह का गुणांक (Multiplier) होता है, जिसका इस्तेमाल कर्मचारियों की मौजूदा बेसिक सैलरी को गुणा करके नया मूल वेतन तय करने के लिए किया जाता है। जब भी कोई नया वेतन आयोग लागू होता है, तो पुरानी सैलरी को नए ढांचे में ढालने के लिए इसका सहारा लिया जाता है।

उदाहरण के तौर पर समझिए, यदि किसी केंद्रीय कर्मचारी की वर्तमान बेसिक सैलरी ₹20,000 है और सरकार फिटमेंट फैक्टर को 2.5 तय करती है, तो नए नियमों के तहत उस कर्मचारी की नई बेसिक सैलरी सीधे बढ़कर ₹50,000 हो जाएगी। इसके बाद भविष्य में मिलने वाला महंगाई भत्ता (DA), ट्रैवल अलाउंस (TA) और हाउस रेंट अलाउंस (HRA) इसी नई ₹50,000 की बेसिक सैलरी को आधार मानकर कैलकुलेट किया जाएगा। यही वजह है कि इसे वेतन वृद्धि की असली चाबी माना जाता है।
लेवल 1 से लेकर लेवल 13 तक के सभी कर्मचारियों पर इसका सीधा असर देखने को मिलता है। यदि सरकार न्यूनतम फिटमेंट फैक्टर यानी 2 के गुणांक पर मुहर लगाती है, तो बेसिक सैलरी पुरानी तुलना में सीधे दोगुनी हो जाएगी, जिससे ₹20,000 का मूल वेतन ₹40,000 में बदल जाएगा।
वहीं, अगर कर्मचारी संगठनों की मांग के अनुरूप फिटमेंट फैक्टर 2.5 तय होता है, तो वही ₹20,000 की बेसिक सैलरी बढ़कर ₹50,000 हो जाएगी। यदि सरकार केंद्रीय कर्मचारियों को सबसे बड़ा तोहफा देते हुए इसे 3 के गुणांक पर ले जाती है, तो मूल वेतन में तीन गुना की छप्परफाड़ वृद्धि होगी और ₹20,000 की सैलरी सीधे ₹60,000 के पार पहुँच जाएगी।
HRA में भी आएगा जबरदस्त उछाल
फिटमेंट फैक्टर बढ़ने का सबसे बड़ा और क्रांतिकारी फायदा केवल बेसिक सैलरी तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सीधा और कड़ा असर कर्मचारियों को मिलने वाले हाउस रेंट अलाउंस (HRA) पर भी पड़ता है। जैसा कि हम जानते हैं, रेलवे और अन्य केंद्रीय विभागों में शहरों की श्रेणी (X, Y और Z कैटेगरी) के हिसाब से 27%, 18% और 9% की दर से एचआरए दिया जाता है।
जैसे ही नए फिटमेंट फैक्टर के कारण कर्मचारियों का मूल वेतन बढ़ेगा, वैसे ही उनके एचआरए की कुल रकम में भी भारी बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी। उदाहरण के लिए, जो कर्मचारी पहले कम बेसिक सैलरी पर 27% एचआरए पा रहे थे, उन्हें अब नए और बढ़े हुए मूल वेतन पर 27% का लाभ मिलेगा।
यही कारण है कि केंद्रीय कर्मचारी संगठन लगातार ऊंचे फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं ताकि उनकी कुल मासिक टेक-होम सैलरी में एक ऐतिहासिक उछाल आ सके और महंगाई के इस दौर में उन्हें पूरा आर्थिक संबल मिल सके।

कैबिनेट के अंतिम फैसले का इंतजा
केंद्र सरकार द्वारा आठवें वेतन आयोग के गठन की आधिकारिक घोषणा के बाद से ही इसके नियम और शर्तों (Terms of Reference) को लेकर बैठकों का दौर जारी है। हालांकि, आयोग के सदस्यों की अंतिम सूची, उनके काम का दायरा और फिटमेंट फैक्टर के अंतिम आंकड़े पर अभी भी सरकार के शीर्ष स्तर से अंतिम फैसला आना बाकी है।
विभिन्न केंद्रीय कर्मचारी यूनियनों और रेलवे मेंस फेडरेशन की मांग है कि इस बार फिटमेंट फैक्टर को कम से कम 2.5 से 3 के बीच रखा जाए ताकि बढ़ती महंगाई के इस दौर में कर्मचारियों को सही मायने में आर्थिक सुरक्षा मिल सके।
अब देश के करोड़ों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की निगाहें वेतन आयोग की अंतिम सिफारिशों और केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी पर टिकी हुई हैं, जो उनके आने वाले भविष्य की आर्थिक दशा और दिशा तय करेगी।