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क्या आप भी देखते हैं पाइरेटेड फिल्में? तो हो जाएं सावधान, मिल सकती है ये सजा

क्या आप भी देखते हैं पाइरेटेड फिल्में? तो हो जाएं सावधान, मिल सकती है ये सजा

Pirated Movies Indian Law: अभी के समय में फिल्म देखने का तरीका बहुत ही ज्यादा बदल गया है। अब ज्यादातर लोग थिएटर पर नहीं बल्कि डिजिटल या फिर ओटीटी प्लेटफॉर्म पर नई फिल्मों के रिलीज होने का इंतजार करते हैं। काफी लोग तो इन एप्लीकेशंस का सब्सक्रिप्शन ले लेते हैं और थिएटर में जाकर भी फिल्मों को देखते हैं। लेकिन इसके बावजूद एक बहुत बड़ी ऐसी भी कम्युनिटी है जो मुफ्त में फिल्मों को देखने के चक्कर में पाइरेटेड कंटेंट का सहारा ले लेती है।

लेकिन पाइरेटेड मूवी देखने या फिर डाउनलोड करने को लोग कई बार छोटा समझ लेते हैं। लेकिन कानून इसको बहुत ही गंभीर तौर पर देखा है। चाहे फिर फिल्म थिएटर में चल रही है या फिर ओटीटी प्लेटफॉर्म पर। बिना परमिशन के उसको देखना, डाउनलोड करना या फिर शेयर करना कॉपीराइट कानून का उल्लंघन करता है।

भारत के अंदर पाइरेसी पर Copyright Act 1957 के तहत कार्यवाही होती है। इस कानून की धारा 63 के अनुसार किसी भी फिल्म या फिर कंटेंट की अवैध कॉपी बनाना, डाउनलोड करना या फिर शेयर करना अपराध माना गया है। इसमें सिर्फ वेबसाइट चलाने वालों को ही सजा नहीं मिलती है बल्कि जानबूझकर देखने वालों को भी मिल सकती है।

अगर कोई भी इंसान पाइरेटेड फिल्मों को देखने या फिर डाउनलोड करने का दोषी पाया जाता है तो उसको 6 महीने से लेकर 3 साल तक की जय हो सकती है। इसके अलावा उसके ऊपर ₹5000 से लेकर 2 लाख रुपए तक का जुर्माना भी लग सकता है। यह सजा पहली बार के अपराध पर लागू की जाती है।

लेकिन अगर कोई भी इंसान बार-बार पाइरेटेड कंटेंट देखने या फिर उसको बढ़ावा देता हुआ पकड़ा जाता है तो सजा और भी ज्यादा सख्त हो जाती है। दोबारा दोषी पाया जाता है तो जेल की अवधि में वृद्धि हो सकती है और जमाने की रकम भी और ज्यादा बढ़ाई जा सकती है।

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ओटीटी प्लेटफॉर्म से जुड़ी हुई पाइरेसी भी इसी कानून के दायरे में आ जाती है। किसी भी वेब सीरीज या फिर फिल्म को टेलीग्राम लिंक, वेबसाइट या फिर एप्लीकेशन के जरिए फ्री में देखना इलीगल होता है। कई बार तो आईपी एड्रेस के जरिए यूजर तक पहुंच बना ली जाती है।

इसीलिए आपको यह समझने की जरूरत है कि क्या यह रिस्क लेना सही है? कुछ रुपए बचाने की वजह से जेल, भारी जुर्माना और कानूनी झंझट में बेमतलब में फंसना क्यों है? बेहतर यही होगा या तो आप थिएटर में जाकर फिल्म को देखने या फिर ओटीटी प्लेटफॉर्म का लीगल सब्सक्रिप्शन ले ले।

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Kanchan

Senior Journalist & Editorial Writer at Timesbull News Network covering business, technology, market intelligence, and national affairs.